Wednesday, 22 November 2017

हिन्दू धर्म के 29 ऐसे रहस्य, जो अनसुलझे हैं हिन्दू धर्म के 29 ऐसे रहस्य, जो अनसुलझे हैं

हिन्दू धर्म के 29 ऐसे रहस्य, जो अनसुलझे हैं 

क्या कल्पवृक्ष अभी भी है? : वेद और पुराणों में कल्पवृक्ष का उल्लेख मिलता है। कल्पवृक्ष स्वर्ग का एक विशेष वृक्ष है। पौराणिक धर्मग्रंथों और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर व्यक्ति जो भी इच्छा करता है, वह पूर्ण हो जाती है, क्योंकि इस वृक्ष में अपार सकारात्मक ऊर्जा का भंडार होता है। यह वृक्ष समुद्र मंथन से निकला था। समुद्र मंथन से प्राप्त यह वृक्ष देवराज इन्द्र को दे दिया गया था और इन्द्र ने इसकी स्थापना 'सुरकानन वन' (हिमालय के उत्तर में) में कर दी थी।

एक कल्प की आयु : कल्पवृक्ष का अर्थ होता है, जो एक कल्प तक जीवित रहे। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या सचमुच ऐसा कोई वृक्ष था या है? यदि था तो आज भी उसे होना चाहिए था, क्योंकि उसे तो एक कल्प तक जीवित रहना है। यदि ऐसा कोई-सा वृक्ष है तो वह कैसा दिखता है? और उसके क्या फायदे हैं? हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि अपरिजात के वृक्ष को ही कल्पवृक्ष माना जाता है, लेकिन अधिकतर इससे सहमत नहीं हैं।
क्या कामधेनु गाय होती थी? : कामधेनु गाय की उत्पत्ति भी समुद्र मंथन से हुई थी। यह एक चमत्कारी गाय होती थी जिसके दर्शन मात्र से ही सभी तरह के दु:ख-दर्द दूर हो जाते थे। दैवीय शक्तियों से संपन्न यह गाय जिसके भी पास होती थी उससे चमत्कारिक लाभ मिलता था। इस गाय का दूध अमृत के समान माना जाता था। 

गाय हिन्दु्ओं के लिए सबसे पवित्र पशु है। इस धरती पर पहले गायों की कुछ ही प्रजातियां होती थीं। उससे भी प्रारंभिक काल में एक ही प्रजाति थी। आज से लगभग 9,500 वर्ष पूर्व गुरु वशिष्ठ ने गाय के कुल का विस्तार किया और उन्होंने गाय की नई प्रजातियों को भी बनाया, तब गाय की 8 या 10 नस्लें ही थीं जिनका नाम कामधेनु, कपिला, देवनी, नंदनी, भौमा आदि था। कामधेनु के लिए गुरु वशिष्ठ से विश्वामित्र सहित कई अन्य राजाओं ने कई बार युद्ध किया, लेकिन उन्होंने कामधेनु गाय को किसी को भी नहीं दिया। गाय के इस झगड़े में गुरु वशिष्ठ के 100 पुत्र मारे गए थे।
33 कोटि देवता : हिन्दू धर्म के अनुसार गाय में 33 कोटि के देवी-देवता निवास करते हैं। कोटि का अर्थ 'करोड़' नहीं, 'प्रकार' होता है। इसका मतलब गाय में 33 प्रकार के देवता निवास करते हैं। ये देवता हैं- 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और 2 अश्‍विन कुमार। ये मिलकर कुल 33 होते हैं।
गाय की सूर्यकेतु नाड़ी : गाय की पीठ पर रीढ़ की हड्डी में स्थित सूर्यकेतु स्नायु हानिकारक विकिरण को रोककर वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं। यह पर्यावरण के लिए लाभदायक है। दूसरी ओर, सूर्यकेतु नाड़ी सूर्य के संपर्क में आने पर यह स्वर्ण का उत्पादन करती है। गाय के शरीर से उत्पन्न यह सोना गाय के दूध, मूत्र व गोबर में मिलता है। यह स्वर्ण दूध या मूत्र पीने से शरीर में जाता है और गोबर के माध्यम से खेतों में। कई रोगियों को स्वर्ण भस्म दिया जाता है।
पंचगव्य : पंचगव्य कई रोगों में लाभदायक है। पंचगव्य का निर्माण गाय के दूध, दही, घी, मूत्र, गोबर द्वारा किया जाता है। पंचगव्य द्वारा शरीर की रोग निरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगों को दूर किया जाता है। ऐसा कोई रोग नहीं है जिसका इलाज पंचगव्य से न किया जा सके।

कैलाश पर्वत और देव आत्मस्थान : उत्तराखंड में एक ऐसा रहस्यमय स्थान है जिसे देवस्थान कहते हैं। मुण्डकोपनिषद के अनुसार सूक्ष्म-शरीरधारी आत्माओं का एक संघ है। इनका केंद्र हिमालय की वादियों में उत्तराखंड में स्थित है। इसे देवात्मा हिमालय कहा जाता है। इन दुर्गम क्षेत्रों में स्थूल-शरीरधारी व्यक्ति सामान्यतया नहीं पहुंच पाते हैं।
अपने श्रेष्ठ कर्मों के अनुसार सूक्ष्म - शरीरधारी आत्माएं यहां प्रवेश कर जाती हैं। जब भी पृथ्वी पर संकट आता है, नेक और श्रेष्ठ व्यक्तियों की सहायता करने के लिए वे पृथ्वी पर भी आती हैं। देवताओं, यक्षों, गंधर्वों, सिद्ध पुरुषों का निवास इसी क्षेत्र में पाया जाता रहा है।
देवस्थान : प्राचीनकाल में हिमालय में ही देवता रहते थे। यहीं पर ब्रह्मा, विष्णु और शिव का स्थान था और यहीं पर नंदनकानन वन में इंद्र का राज्य था। इंद्र के राज्य के पास ही गंधर्वों और यक्षों का भी राज्य था। स्वर्ग की स्थिति 2 जगह बताई गई है- पहली हिमालय में और दूसरी कैलाश पर्वत के कई योजन ऊपर। यहीं पर मानसरोवर है और इसी हिमालय में अमरनाथ की गुफाएं हैं।
अन्य रहस्यमय बातें : हिमालय में ही यति जैसे कई रहस्यमय प्राणी रहते हैं। इसके अलावा यहां चमत्कारिक और दुर्लभ जड़ी-बूटियां भी मिलती हैं। भारत और चीन की सेना ने हिमालय क्षेत्र में ही एलियन और यूएफओ को देखने का दावा किया है। हिमालय में ही एक रूपकुंड झील है। इसके तट पर मानव कंकाल पाए गए हैं। पिछले कई वर्षों से भारतीय और यूरोपीय वैज्ञानिकों के विभिन्न समूहों ने इस रहस्य को सुलझाने के कई प्रयास किए, पर नाकाम रहे।

सोमरस आखिर क्या था? सोमरस के बारे में अक्सर पढ़ने और सुनने को मिलता है। आखिर यह सोमरस क्या था? क्या यह शराब जैसा कोई पदार्थ था या कि यह व्यक्ति को युवा बनाए रखने वाला कोई रस था?

ऋग्वेद में शराब की घोर निंदा करते हुए कहा गया है-
।।हृत्सु पीतासो युध्यन्ते दुर्मदासो न सुरायाम्।।
अर्थात : सुरापान करने या नशीले पदार्थों को पीने वाले अक्सर युद्ध, मार-पिटाई या उत्पात मचाया करते हैं।
हालांकि वेदों में शराब को बुराइयों की जड़ कहा गया है, ऐसे में वे देवताओं को कैसे शराब चढ़ा सकते हैं। सुरापान और सोमरस में फर्क था।
अमृत कलश : समुद्र मंथन के दौरान क्या कोई ऐसा रस निकला था जिसे पीकर देवताओं ने अमरता को प्राप्त कर लिया था? यदि समुद्र से ऐसा कोई रस निकल सकता है तो क्या आज नहीं निकल सकता? जरूरी है कि समुद्र से ही निकले? अमृत कलश के लिए देव और दैत्यों के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। सचमुच अमृत का निकलना एक रहस्य ही है। हालांकि वैज्ञानिक ऐसी दवा बनाने में लगे हैं जिसे पीकर व्यक्ति अधिक समय तक जवान बना रह सके।
अमर होने का रहस्य : अमर कौन नहीं होना चाहता? समुद्र मंथन में अमृत निकला। इसे प्राप्त करने के लिए देवताओं ने दानवों के साथ छल किया। देवता अमर हो गए। मतलब कि क्या समुद्र में ऐसा कुछ है कि उसमें से अमृत निकले? तो आज भी निकल सकता है? अभी अधिकतम 100 साल के जीवन में अनेकानेक रोग, कष्ट, संताप और झंझट हैं तो अमरता प्राप्त करने पर क्या होगा? 100 वर्ष बाद वैराग्य प्राप्त कर व्यक्ति हिमालय चला जाएगा। वहां क्या करेगा? बोर हो जाएगा तो फिर से संसार में आकर रहेगा। बस यही सिलसिला चलता रहेगा।
महाभारत में 7 चिरंजीवियों का उल्लेख मिलता है। चिरंजीवी का मतलब अमर व्यक्ति। अमर का अर्थ, जो कभी मर नहीं सकते। ये 7 चिरंजीवी हैं- राजा बलि, परशुराम, विभीषण, हनुमानजी, वेदव्यास, अश्वत्थामा और कृपाचार्य। हालांकि कुछ विद्वान मानते हैं कि मार्कंडेय ऋषि भी चिरंजीवी हैं।
माना जाता है कि ये सातों पिछले कई हजार वर्षों से इस धरती पर रह रहे हैं, लेकिन क्या धरती पर रहकर इतने हजारों वर्ष तक जीवित रहना संभव है? हालांकि कई ऐसे ऋषि-मुनि थे, जो धरती के बाहर जाकर फिर लौट आते थे और इस तरह वे अपनी उम्र फ्रिज कर बढ़ते रहते थे। हालांकि हिमालय में रहने से भी उम्र बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। हिन्दू धर्मशास्त्रों में ऐसी कई कथाएं हैं जिसमें लिखा है कि अमरता प्राप्त करने के लिए फलां-फलां दैत्य या साधु ने घोर तप करके शिवजी को प्रसन्न कर लिया। बाद में उसे मारने के लिए भगवान के भी पसीने छूट गए। अमर होने के लिए कई ऐसे मंत्र हैं जिनके जपने से शरीर हमेशा युवा बना रहता है। 'महामृत्युंजय' मंत्र के बारे में कहा जाता है कि इसके माध्यम से अमरता पाई जा सकती है।
वेद, उपनिषद, गीता, महाभारत, पुराण, योग और आयुर्वेद में अमरत्व प्राप्त करने के अनेक साधन बताए गए हैं। आयुर्वेद में कायाकल्प की विधि उसका ही एक हिस्सा है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि विज्ञान इस दिशा में क्या कर रहा है? विज्ञान भी इस दिशा में काम कर रहा है कि किस तरह व्यक्ति अमर हो जाए अर्थात कभी नहीं मरे।
सावित्री-सत्यवान की कथा तो आपने सुनी ही होगी। सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। सावित्री और यमराज के बीच लंबा संवाद हुआ। इसके बाद भी यह पता नहीं चलता है कि सावित्री ने ऐसा क्या किया कि सत्यवान फिर से जीवित हो उठा। इस जीवित कर देने या हो जाने की प्रक्रिया के बारे में महाभारत भी मौन है। जरूर सावित्री के पास कोई प्रक्रिया रही होगी। जिस दिन यह प्रक्रिया वैज्ञानिक ढंग से ज्ञात हो जाएगी, हम अमरत्व प्राप्त कर लेंगे।
आपने अमरबेल का नाम सुना होगा। विज्ञान चाहता है कि मनुष्य भी इसी तरह का बन जाए, कायापलट करता रहा और जिंदा बना रहे। वैज्ञानिकों का एक समूह चरणबद्ध ढंग से इंसान को अमर बनाने में लगा हुआ है। समुद्र में जेलीफिश (टयूल्रीटोप्सिस न्यूट्रीकुला) नामक मछली पाई जाती है। यह तकनीकी दृष्टि से कभी नहीं मरती है। हां, यदि आप इसकी हत्या कर दें या कोई अन्य जीव जेलीफिश का भक्षण कर ले, फिर तो उसे मरना ही है। इस कारण इसे इम्मोर्टल जेलीफिश भी कहा जाता है। जेलीफिश बुढ़ापे से बाल्यकाल की ओर लौटने की क्षमता रखती है। अगर वैज्ञानिक जेलीफिश के अमरता के रहस्य को सुलझा लें, तो मानव अमर हो सकता है।
क्या कर रहे हैं वैज्ञानिक? : वैज्ञानिक अमरता के रहस्यों से पर्दा हटाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के लिए कई तरह की दवाइयों और सर्जरी का विकास किया जा रहा है। अब इसमें योग और आयुर्वेद को भी महत्व दिया जाने लगा है। बढ़ती उम्र के प्रभाव को रोकने के बारे में आयोजित एक व्यापक सर्वे में पाया गया कि उम्र बढ़ाने वाली 'गोली' को बनाना संभव है। रूस के साइबेरिया के जंगलों में एक औषधि पाई जाती है जिसे जिंगसिंग कहते हैं। चीन के लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल करके देर तक युवा बने रहते हैं।
'जर्नल नेचर' में प्रकाशित 'पजल, प्रॉमिस एंड क्योर ऑफ एजिंग' नामक रिव्यू में कहा गया है कि आने वाले दशकों में इंसान का जीवनकाल बढ़ा पाना लगभग संभव हो पाएगा। अखबार 'डेली टेलीग्राफ' के अनुसार एज रिसर्च पर बक इंस्टीट्यूट, कैलिफॉर्निया के डॉक्टर जूडिथ कैंपिसी ने बताया कि सिंपल ऑर्गनिज्म के बारे में मौजूदा नतीजों से इसमें कोई शक नहीं कि जीवनकाल को बढ़ाया-घटाया जा सकता है। पहले भी कई स्टडीज में पाया जा चुका है कि अगर बढ़ती उम्र के असर को उजागर करने वाले जिनेटिक प्रोसेस को बंद कर दिया जाए, तो इंसान हमेशा जवान बना रह सकता है। जर्नल सेल के जुलाई के अंक में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती उम्र का प्रभाव जिनेटिक प्लान का हिस्सा हो सकता है, शारीरिक गतिविधियों का नतीजा नहीं। खोज और रिसर्च जारी है...। 

महान योद्धा बर्बरीक और घटोत्कच : बर्बरीक महान पांडव भीम के पुत्र घटोत्कच और नागकन्या अहिलवती के पुत्र थे। कहीं-कहीं पर मुर दैत्य की पुत्री 'कामकंटकटा' के उदर से भी इनके जन्म होने की बात कही गई है। बर्बरीक और घटोत्कच के बारे में कहा जाता है कि ये दोनों ही विशालकाय मानव थे। घटोत्कच ने कौरवों की सेना में कोहराम मचा दिया था। आखिरकार कर्ण ने उस अस्त्र का उपयोग किया जिसे वह अर्जुन पर चलाना चाहते थे और घटोत्कच मारा गया।

महाभारत का युद्ध जब तय हो गया तो बर्बरीक ने भी युद्ध में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की और मां को हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन दिया। बर्बरीक अपने नीले रंग के घोड़े पर सवार होकर 3 बाण और धनुष के साथ कुरुक्षेत्र की रणभूमि की ओर अग्रसर हुए।
बर्बरीक के लिए 3 बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरव और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। यह जानकर भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण के वेश में उनके सामने उपस्थित होकर उनसे दान में छलपूर्वक उनका शीश मांग लिया।
बर्बरीक ने कृष्ण से प्रार्थना की कि वे अंत तक युद्ध देखना चाहते हैं, तब कृष्ण ने उनकी यह बात स्वीकार कर ली। फाल्गुन मास की द्वादशी को उन्होंने अपने शीश का दान दिया। भगवान ने उस शीश को अमृत से सींचकर सबसे ऊंची जगह पर रख दिया ताकि वे महाभारत युद्ध देख सकें। उनका सिर युद्धभूमि के समीप ही एक पहाड़ी पर रख दिया गया, जहां से बर्बरीक संपूर्ण युद्ध का जायजा ले सकते थे।

द्वारिका नगर : मथुरा से निकलकर भगवान कृष्ण ने द्वारिका क्षेत्र में ही पहले से स्थापित खंडहर हो चुके नगर क्षेत्र में एक नए नगर की स्थापना की थी। कहना चाहिए कि भगवान कृष्ण ने अपने पूर्वजों की भूमि को फिर से रहने लायक बनाया था। प्राचीन इतिहास की खोज करने वाले इतिहासकारों के अनुसार द्वारिका विश्‍व का सबसे रहस्यमय शहर है। इस शहर पर अभी भी शोध जारी है।

कई द्वारों का शहर होने के कारण 'द्वारिका' इसका नाम पड़ा। इस शहर के चारों ओर बहुत ही लंबी दीवार थी जिसमें कई द्वार थे। वह दीवार आज भी समुद्र के तल में स्थित है। भारत के सबसे प्राचीन नगरों में से एक है द्वारिका। ये 7 नगर हैं- द्वारिका, मथुरा, काशी, हरिद्वार, अवंतिका, कांची और अयोध्या। द्वारिका को द्वारावती, कुशस्थली, आनर्तक, ओखा-मंडल, गोमती द्वारिका, चक्रतीर्थ, अंतरद्वीप, वारिदुर्ग, उदधिमध्य स्थान भी कहा जाता है।
गुजरात राज्य के पश्चिमी सिरे पर समुद्र के किनारे स्थित 4 धामों में से 1 धाम और 7 पवित्र पुरियों में से एक पुरी है द्वारिका। द्वारिका 2 हैं- गोमती द्वारिका, बेट द्वारिका। गोमती द्वारिका धाम है, बेट द्वारिका पुरी है। बेट द्वारिका के लिए समुद्र मार्ग से जाना पड़ता है।
एक समय था, जब लोग कहते थे कि द्वारिका नगरी एक काल्‍पनिक नगर है, लेकिन इस कल्‍पना को सच साबित कर दिखाया ऑर्कियोलॉजिस्‍ट प्रो. एसआर राव ने। प्रो. राव ने मैसूर विश्‍वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद बड़ौदा में राज्‍य पुरातत्‍व विभाग ज्‍वॉइन कर लिया था। उसके बाद भारतीय पुरातत्‍व विभाग में काम किया। प्रो. राव और उनकी टीम ने 1979-80 में समुद्र में 560 मीटर लंबी द्वारिका की दीवार की खोज की। साथ में उन्‍हें वहां पर उस समय के बर्तन भी मिले, जो 1528 ईसा पूर्व से 3000 ईसा पूर्व के हैं। इसके अलावा सिन्धु घाटी सभ्‍यता के भी कई अवशेष उन्‍होंने खोजे। उस जगह पर भी उन्‍होंने खुदाई में कई रहस्‍य खोले, जहां पर कुरुक्षेत्र का युद्ध हुआ था।

कैलाश मंदिर : गुफाएं तो भारत में बहुत हैं, लेकिन अजंता-एलोरा की गुफाओं के बारे में वैज्ञानिक कहते हैं कि ये किसी एलियंस के समूह ने बनाई हैं। यहां पर एक विशालकाय कैलाश मंदिर है। आर्कियोलॉजिस्टों के अनुसार इसे कम से कम 4,000 वर्ष पूर्व बनाया गया था। 40 लाख टन की चट्टानों से बनाए गए इस मंदिर को किस तकनीक से बनाया गया होगा? यह आज की आधुनिक इंजीनियरिंग के बस की भी बात नहीं है।

माना जाता है कि एलोरा की गुफाओं के अंदर नीचे एक सीक्रेट शहर है। आर्कियोलॉजिकल और जियोलॉजिस्ट की रिसर्च से यह पता चला कि ये कोई सामान्य गुफाएं नहीं हैं। इन गुफाओं को कोई आम इंसान या आज की आधुनिक तकनीक नहीं बना सकती। यहां एक ऐसी सुरंग है, जो इसे अंडरग्राउंड शहर में ले जाती है।
क्या सचमुच ही कर्ण के कवच और कुंड आज भी बनाए जा सकते हैं? 
भगवान कृष्ण यह भली-भांति जानते थे कि जब तक कर्ण के पास उसका कवच और कुंडल हैं, तब तक उसे कोई नहीं मार सकता। ऐसे में अर्जुन की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं। उधर देवराज इन्द्र भी चिंतित थे, क्योंकि अर्जुन उनका पुत्र था। भगवान कृष्ण और देवराज इन्द्र दोनों जानते थे कि जब तक कर्ण के पास पैदायशी कवच और कुंडल हैं, वह युद्ध में अजेय रहेगा।

तब कृष्ण ने देवराज इन्द्र को एक उपाय बताया और फिर देवराज इन्द्र एक ब्राह्मण के वेश में पहुंच गए कर्ण के द्वार। देवराज भी सभी के साथ लाइन में खड़े हो गए। कर्ण सभी को कुछ न कुछ दान देते जा रहे थे। बाद में जब देवराज का नंबर आया तो दानी कर्ण ने पूछा- विप्रवर, आज्ञा कीजिए! किस वस्तु की अभिलाषा लेकर आए हैं? तब देवराज इंद्र ने छल से उनके कवच और कुंडल दान में ले लिए थे।
कहां से आया सुदर्शन चक्र? कहते हैं कि सुदर्शन चक्र एक ऐसा अचूक अस्त्र था कि जिसे छोड़ने के बाद यह लक्ष्य का पीछा करता था और उसका काम तमाम करके वापस छोड़े गए स्थान पर आ जाता था। इस चक्र को विष्णु की तर्जनी अंगुली में घूमते हुए बताया जाता है। सबसे पहले यह चक्र उन्हीं के पास था।

पुराणों के अनुसार विभिन्न देवताओं के पास अपने-अपने चक्र हुआ करते थे। सभी चक्रों की अलग-अलग क्षमता होती थी और सभी के चक्रों के नाम भी होते थे। महाभारत युद्ध में भगवान कृष्ण के पास सुदर्शन चक्र था। यह सुदर्शन चक्र कहां से आया था और चक्रों का जन्मदाता कौन था? क्या आज भी इस तरह का अस्त्र बनाया जा सकता है? या कि यह एक चमत्कारिक शक्ति से ही संचालित होता था किसी मशीन द्वारा नहीं? ऐसे कई सवाल हैं जिनका रहस्य अभी भी बरकरार है। हालांकि आजकल ऐसी मिसाइलें बनने लगी हैं, जो लक्ष्य को भेदकर आपस लौट आती हैं, लेकिन चक्र जैसा अस्त्र तो सचमुच ही अद्भुत है।

रस्सी का जादू : आज पश्‍चिमी देशों में तरह-तरह की जादू-विद्या लोकप्रिय है और समाज में हर वर्ग के लोग इसका अभ्यास करते हैं। एक समय था, जब भारत में जादूगरों की भरमार थी। इस देश में एक से एक जादूगर, सम्मोहनविद, इंद्रजाल, नट, सपेरे और करतब दिखाने वाले होते थे। बंगाल का काला जादू तो विश्वप्रसिद्ध था। 

यूरोप की कल्पना में भारत सदा से बेहिसाब संपत्ति और अलौकिक घटनाओं का एक अविश्वसनीय देश रहा है, जहां बुद्धिमान, जादूगर, सिद्ध आदि व्यक्तियों की संख्या सामान्य से कुछ अधिक थी। विदेशी भ्रमणकर्ताओं और व्यापारियों ने भारत से कई तरह का जादू सीखा और उसे अपने देश में ले जाकर विकसित किया। बाद में इसी तरह के जादू का इस्तेमाल धर्म प्रचार के लिए किया गया। आजकल भारत जादू के मामले में पिछड़ गया है। एक समय था, जब सोवियत संघ और रोम में जादूगरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और हजारों जादूगरों का कत्ल कर दिया गया था, लेकिन आजकल अमेरिका और योरप के कई देशों में आज भी जादूगरों की धूम है।
भारत में सड़क या चौराहे पर जादूगर एक जादू दिखाते थे जिसे रस्सी का जादू या करतब कहा जाता था। बीन या पुंगी की धुन पर वह रस्सी सांप के पिटारे से निकलकर आसमान में चली जाती थी और जादूगर उस हवा में झूलती रस्सी पर चढ़कर आसमान में कहीं गायब हो जाता था।
अंग्रजों के काल में किसी ने यह जादू दिखाया था, उसके बाद से इस जादू के बारे में सुना ही जाता है। अब इसे दिखाने वाला कोई नहीं है। यही कारण है कि इस जादू को दिखाना अब किसी भी जादूगर के बस की बात नहीं रही। यह विद्या लगभग खो-सी गई है। इसके खो जाने के कारण अब यह संदेह किया जाता है कि कहीं ऐसा जादू दिखाया भी जाता था या नहीं? हिन्दू धर्म के 29 ऐसे रहस्य, जो 7 at 


Tuesday, 21 November 2017

ये 15 धांसू तस्वीरें देख कर आप ज़रूर कहेंगे कि ‘आंटी, अब हम पुलिस बुला लेंगे’

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1. ये आंटियां सब पर भारी, जा रही हैं ट्रिपल सवारी



ये है भानगढ़ के भूतहा होने की पीछे की असल कहानी

ये है भानगढ़ के भूतहा होने की पीछे की असल कहानी

ये है भानगढ़ के भूतहा होने की पीछे की असल कहानी

भानगढ़ का किला वैसे भारतीय पुरातत्व के द्वारा इस खंडहर को संरक्षित कर दिया गया है। गौर करने वाली बात है जहां पुरात्तव विभाग ने हर संरक्षित क्षेत्र में अपने ऑफिस बनवाएं है वहीँ इस किले के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग ने...

नई दिल्लीभानगढ़ जिसे भूतों को किला कहा जाता है। जिसका नाम सुनते ही कई लोगो डर भी जाते है। इसे आम बोलचाल की भाषा में भूतों का भानगढ़ कहा जाता है। भानगढ का किला राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। माना जाता है कि 16वीं शताब्दी में यह बसा था और 300 साल तक भानगढं खूब फलता रहा, लेकिन उसके बाद तो इसमें ऐसा कुछ हुआ कि आज ये वीरान पड़ा हुआ है।
कहा जाता हैकि भानगढ़ की राजकुमारी सहित पूरा समाज्य भी मौत के मुंह में चला गया था। लेकिन आप जानते है इसका कारण क्या था। वो है काला जादू के तांत्रिक के शाप के कारण आज ये जह भूतों से भरी हुई है।
भानगढ़ का किला वैसे भारतीय पुरातत्व के द्वारा इस खंडहर को संरक्षित कर दिया गया है। गौर करने वाली बात है जहां पुरात्तव विभाग ने हर संरक्षित क्षेत्र में अपने ऑफिस बनवाएं है वहीँ इस किले के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग ने अपना ऑफिस भानगढ़ से दूर बनाया है। जानिए आखिर इसके पलन का क्या है कारण जो आज यहां पर भूतों का डेरा है।
कहा जाता है कि भानगढ़ कि राजकुमारी रत्नावती बेहद खुबसुरत थी। उस समय उनके रूप की चर्चा पूरे राज्य में थी और देश के कोने-कोने के राजकुमार उनसे विवाह करने के इच्छु‍क थे। उस समय उनकी उम्र महज 18 साल ही थी और उनका यौवन उनके रूप में और निखार ला चुका था।
उस समय कई राज्यो से उनके लिए विवाह के प्रस्ताव आ रहे थे। उसी दौरान वो एक बार किले से अपनी सखियों के साथ बाजार के लिए निकली थीं। राजकुमारी रत्नावती एक इत्र की दुकान पर पहुंची और वो इत्रों को हाथों में लेकर उसकी खुशबू ले रही थी।
उसी समय उस दुकान से कुछ ही दूरी सिंधु सेवड़ा नाम का व्यक्ति खड़ा होकर उसे बहुत ही गौर से देख रहा था। व भी उसी राजेय में रहता था, लेकिन वह काले जादी का बहुत बड़ा महारथी था। ऐसा बताया जाता है कि वो राजकुमारी के रूप का दिवाना था और उनसे प्रगाण प्रेम करता था।
इसी कारण वो किसी भी तरह राजकुमारी को हासिल करना चाहता था। इसलिए उसने उस दुकान के पास आकर राजकुमारी को वशीकरण करने के लिए एक इत्र के बोतल में जिसे वो पसंद कर रही थी। उसमें काला जादू कर दिया, लेकिन एक विश्वशनीय व्यक्ति ने राजकुमारी को इस राज के बारे में बता दिया।
इसके बाद राजकुमारी रत्नाकवती ने उस इत्र के बोतल को उठाया, और उसे पास के एक पत्थर पर पटक दिया। पत्थर पर पटकते ही वो बोतल टूट गया और सारा इत्र उस पत्‍थर पर बिखर गया। इसके बाद से ही वो पत्थर फिसलते हुए उस तांत्रिक सिंधु सेवड़ा के पीछे चल पड़ा और तांत्रिक को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी। मरने से पहले तांत्रिक ने शाप दिया कि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्दी ही मर जायेंगे और वो दोबारा जन्म नहीं ले सकेंगे और ताउम्र उनकी आत्मांएं इस किले में भटकती रहेंगी।
उस तांत्रिक के मौत के कुछ दिनों के बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ के बीच युद्ध हुआ जिसमें किले में रहने वाले सारे लोग मारे गये। यहां तक की राजकुमारी रत्नावती भी उस शाप से नहीं बच सकी और उनकी भी मौत हो गयी। एक ही किले में एक साथ इतने बड़े कत्लेआम के बाद वहां मौत की चींखें गूंज गयी और आज भी उस किले में उनकी रू‍हें घुमती हैं।

दुनिया की 2 सबसे रहस्यमय जगह जिसके बारे में आप नहीं जानते

दुनिया की 2 सबसे रहस्यमय जगह जिसके बारे में आप नहीं जानते

दुनिया के सात अजूबों के बारे में तो बहुत से लोगों को पता है. लेकिन दुनिया में बहुत सी जगह ऐसी भी है. जो की बहुत ही खूबसूरत और हैरान कर देने वाली है. यह दुनिया  अजीबो गरीब और रहस्यमई चीजों से भरी हुई है इन नहीं चीजों के बारे में जानने की उत्सुकता हम सभी को होती है. ऐसे रहस्य जिनको सुलझा पाने में विज्ञान भी समर्थ नहीं है. आज इस पोस्ट में ऐसे ही 5 रहस्यमई चीजों के बारे में जानेंगे जिनको खोजे जाने के बाद से ही पूरी दुनिया को हैरान कृति रही है और इसके साथ ही जानेंगे वैज्ञानिक तर्कों को जिनके जिनसे रहस्यों को समझने में हमें थोड़ी सी मदद मिलेगी.

1. Nazca Line Peru

नाज़का लाइने अगर आप हवाई जहाज में किसी इलाके के ऊपर उड़ रहे हैं. और अचानक ही आपको धरती पर सैकड़ों मीटर में बने कुछ चित्र नजर आए तो हैरान होना लाजमी  बात है
पहली बार जब इन चित्रों को देखा गया था तो पूरी दुनिया हैरान रह गई.यह साफ नहीं  हो पाया कि इतने बड़े चित्रों के बनाने के पीछे क्या राज था यह चित्र किसी अनजान सी सभ्यता की अनूठी विरासत है. नाज़का लाइने यह लाइंस धरती पर बनी विशाल रेखा चित्र है. 80 किलोमीटर से ज्यादा फैले इलाके में ऐसे सैकड़ों चित्र है. इन लाइन  मैं  बंदर पक्षी और दूसरे जीवो के अलावा कई ज्यामितीय ईखाएं है.ट्रायंगल सुकेर और दूसरी  सरंचनाए शामिल है. लैटिन अमेरिका के पेरू में नाशखा मरुस्थल  में मौजूद ये सरंचनाए नाजका  संस्कृति की विरासत मानी जाती है. घी बनाने का समय ईसवी से 500 साल पहले  ईसवी से 500 साल बाद का माना जाता है इन लंबी लंबी पत्थरों की कतारों को जमीन से देखने पर सिवाय एक मकड़ी के जाल के अलावा कुछ नजर नहीं आता लेकिन ऊपर से देखने पर यही मकड़जाल कलाकारी का एक नमूना नजर आता है.  नाजका में  इन लाइन्स को देखने से दिमाग हैरत से सुन होने लगता है.
सैकड़ों मीटर में फैली यह लाइंस आखिर किसने बनाई. और उन लोगों का इन्हें बनाने के पीछे क्या मकसद था क्या आज से 2500 साल पहले इंसान के पास इतनी टेक्नोलॉजी थी.जो  इन लाइन को इतना सटीक बना सके. क्योंकि धरती पर खड़े होकर देखने से इन लाइन्स के बारे में कुछ पता नहीं लगता. इनका पूरा पैटर्न आसमान से पूरी तरह नजर आता है. क्या उस सभ्यता के पास ऐसे साधन थे जो उन्हें आसमान में उड़ा सकते थे आइए जानने की कोशिश करते हैं इस खुद को सबसे ज्यादा पहचान जर्मन गणितज्ञ और पुरातत्त्ववेत्ता मारिया रीची की वजह से मिली जिन्होंने इन रेखाओं का गहराई से अध्ययन किया मकडी, छिपकली, मछली, शेर, शार्क ,और बंदर के अलावा हमिंग बर्ड भी साफ साफ पहचाने जाती है. इनमे  इंसान की आकृति बनी है. इंडिया का सबसे बड़ा चित्र 200 मीटर तक की लंबाई में फैला हुआ है.
पहले तो यह माना गया था कि यह सचाई के लिए बनाई गई छोटी छोटी  नहरे या नालियां है. कुछ विद्वानों का मानना है कि यह चित्र धार्मिक संघर्ष से जुड़े हुए हैं और इनमे प्रकृति पूजा का चित्रण किया गया है. ऐसे ही कई  तरक के बारे में दिए गए हैं. तो आइए जानते हैं वे कौन-कौन से तर्क हैं एलियंस इंसानी फितरत है. कि जो चीज समझ में ना आए या तो उसे  पारलौकित ताकतों का नाम दे दो या फिर उसे एलियंस से जोड़ दो कुछ टीचर और किताब  चेरियट ऑफ गॉड एरिक  यह दलील दी है. की नाजका  के प्राचीन लोगों ने एलियंस के साथ मिलकर इन्हें बनाया था ताकि वह अपने उड़न तश्तरियां यहां उतार सके. यानी उनके हिसाब से धरती पर यह लाइनें कुछ और ना होकर एलियंस के एयरपोर्ट .
लेकिन इस  तर्क से एक और सवाल खड़ा हो जाता है. आखिर  पेरू के नाजका एलियंस आते क्यों थे . इस पर लोगों का दावा है. कि एलियंस धरती पर मौजूद खनिज धातुएं आदि के बारे में जानना चाहते थे ठीक वैसे ही जैसे हम मंगल ग्रह की जमीन के बारे में जानना चाहते हैं इसके लिए उन्हें पैरों के रेगिस्तान से बढ़िया जगह नहीं मिली जहां सालों से बारिश नहीं होती . जिसकी मिट्टी में लोहा और उसका ऑक्साइड मिलता है एलियंस को नाजका में बार-बार उतरना पड़ता था. इसलिए उन्होंने वहां पर अपना एयरपोर्ट बना लिया. अगर इस तर्क को मान भी लिया जाए. की एलियंस ने इस जगह का इस्तेमाल एयरपोर्ट के लिए किया था लेकिन इससे यह बात साफ नहीं होती कि उन्होंने इन लाइन्स को जानवरों और हर पक्षियों के पैटर्न में क्या बनाएं. एलियंस इन सीधे-सीधे पैटर्न में भी बना सकते थे. और यदि एलियंस धरती पर आते भेजिए तो इतने बड़े इलाके में एयरपोर्ट बनाने की बात कुछ खास नहीं लगती लेकिन फिर भी कुछ लोगों इन्हें एलियंस के द्वारा बनाई गई  लाइन्स ही मानते हैं.
लेकिन यदि इन लाइन्स एलियंस ने नहीं  तो इनको किस ने बनाया. क्योंकि आज से 2500 साल पहले तो इंसान का हवा में उड़ने का कोई प्रमाण नहीं मिलतातो वह बिना हवा में ऊंचाई इतनी सटीक लाइन कैसे बना सकते हैं.  तो इनको बनाने के पीछे कई मत प्रचलित हैं.  एक मान्यता इनके महत्व को दर्शाती है. हर  क्षेत्र के वैज्ञानिकों ने इन रेखाओ का अध्ययन किया और पाया कि नाजका  लोगों ने इसलिए बनाया था कि आसमान में रहने वाले देवता  उन्हें साफ-साफ देख सके लेकिन वह कभी भी पता नहीं चल पाया कि उनके देवता कौन थे. वहीं दूसरी मान्यता इन्हें खगोलीय पिंड  की स्थिति का अध्ययन और कैलेंडर के निर्माण से जोड़ते  है  इस तर्क के हिसाब से यह चित्र संपूर्ण वैद्यशाला के क्या काम करते थे . इन रेखाओं के जरिए सितारों की स्थिति बताई जाती थी ऐसा नामुमकिन भी नहीं है क्योंकि हर प्राचीन सभ्यता में इस तरह की वेधशाला मिली है जिनमें स्टोनहेंज प्रमुख है इन  तर्को से यह तो पता चलता है इन्हें  क्यों बनाया होगा लेकिन अभी तक हम यह नहीं जान पाए हैं कि इन्हें बनाया कैसे गया होगा लेकिन कुछ खोजकर्ताओं के पास इसका भी जवाब है इन आकृतियों को इनके सही पैटर्न में आकाश मार्ग या  रिमोट हाइट सही दिखा जा सकता है.
इस अनुमान की पुष्टि में वैज्ञानिक जिम गुडमैन  मैं एक गुब्बारे का निर्माण किया था जो आसमान में इतनी दूरी तक उड़ सकता था जहां से इन लाइन्स को साफ-साफ देखा जा सकता था. उनका मानना था कि इस तरह के गुब्बारे बनाने में ही यह  सभ्यता समर्थ हो सकती थी. लेकिन इंसानी दस्तावेज में काल में ऐसे किसी को बारे का कोई प्रमाण नहीं मिलता है लेकिन कुछ वैज्ञानिक मानते हैं की  इस सभ्यता के पास मैथमेटिक्स और जियोमेट्रिक का इतना ज्ञान था कि वह धरती पर रहकर ही इतनी बड़ी  रेखाएं बनाने में समर्थ थे इसमें   बिना किसी अंतरिक्ष यान और बिना किसी हवाई सर्वेक्षण की इतनी बड़ी रेखाएं  बनाना  सच में हैरान कर देने वाला था लगभग 80 साल से इनका रहस्य ऐसे ही बरकरार है. हजारों की संख्या में बने चित्र यह तो बताते हैं इनके पीछे कोई ना कोई मकसद तो जरूर रहा होगा. इन चित्रों का मकसद जो भी रहा हो लेकिन इन चित्रों देखकर एक बार जरूर मन में आती है जाने वो कैसे लोग थे.

2. डेथ वैली के खिसकते पत्थर

आपने अमेरिका के गर्म इलाके डेथ वैली के बारे में तो सुना ही होगा लेकिन क्या आपको पता है इस के कई इलाकों में पत्थर के अपने आप खिसकने की घटना बहुत आम है इन  पत्थरों में कुछ पत्थरों का वजन तो कई टन तक है यह पत्थर अपने आप आगे चलते हैं जिसके कारण इसके चलने का निशान  पीछे छूटता जाता है डेथ वैली में रहस्यमय ढंग से खिसकने वाले पत्थरों को देखा गया है इन पत्थरों में कई का वजन तो 115 किलोग्राम तक है. बिना किसी मदद के पत्थर  आश्चर्यजनक रूप से इस घाटी की सतह पर अपने आप एकदम सीधी लाइन में चलते हैं.
वजन में भारी होने के बावजूद भी यह पत्थर सैकड़ों फीट तक करते हुए देखे गए हैं  पत्थरों का अपने आप सरकना दुनियाभर में वैज्ञानिकों का अध्ययन बना हुआ है. डेथ वैली उत्तरी अमेरिका का सबसे सूखा गरम और  रहस्यमई इलाका है. यह कैलिफ़ोर्निया दक्षिण पूर्व में  नवेडा  राज्य की सीमा के पास है इसकी लंबाई 225 किलोमीटर है कई वैज्ञानिक का  मानना की तेज हवा और बर्फीली सतह पर होने वाले  हलचल की वजह से होता है.  हालांकि वैज्ञानिकों की इस मान्यता से परे पत्थर अलग अलग दिशाओं में अलग-अलग  रफ्तार  से चलते हैं सकते हुए यह पत्थर अपने पीछे छूट जाते हैं जिसके कारण इनके सरकने का पता चलता है.
यह भी माना जाता है यह पत्थर साल में सिर्फ एक या दो बार ही   चलते हैं लेकिन इन्हें आज तक किसी ने  चलते हुए नहीं देखा है. सिर्फ इनके पीछे छोड़ी गई रेखाओं की वजह से ही उनके खिसकने का पता चलता है इस बारे में की गई कई वैज्ञानिक हो बताते हैं कि  रेगिस्तान में 90 मील प्रति घंटे की रफ्तार से  चलने वाली हवाएं रात को जलने वाली बर्फ और  सतह पर गीली मिट्टी यह सब मिलकर पत्थर को गतिमान करते होगे जबकि कुछ का मानना यह है कि जैसे-जैसे तापमान कम होता है वैसे ही पत्थर से लिखने शुरू हो जाते है.
क्योंकि सतह के नीचे उठने वाले पानी और ऊपर  चलने वाली हवा से पत्थर  खिसकने लगते हैं फोटोग्राफर माइकल बैरन ने यहां  पत्थरों की हलचल को देखने के लिए कई साल बिताएं.डेली टेलीग्राफ में दिए गए इंटरव्यू में बैरन ने बताया की रेगिस्तान में अपने आप चलने वाले पत्थर आदमी के  वजन जितने भारी हैं. इतने भारी पत्थरों का बिना किसी फोर्स के आगे खिसकना लगभग नामुमकिन है. उनके मुताबिक यह पहली आज तक ही अनसुलझी है. इसके पीछे दिए गए  वैज्ञानिक तर्क भी आज तक इसकी सही सही नहीं पता

सबसे बढ़िया आवाज बदलने वाला ऐप

सबसे बढ़िया आवाज बदलने वाला ऐप

सबसे बढ़िया आवाज बदलने वाला ऐप
आज हम आपको हमारे इस आर्टिकल में आपको बताएंगे की आप अपने एंड्राइड मोबाईल फोन से आवज को कैसे बदल सकतें है.  क्या आप जानते है आपके एंड्राइड मोबाईल फोन से आवाज बदल बदल कर बात की जा सकती है. अगर आपको पता नही है तो आज हम आपको बताते है की कैसे आवाज बदल कर आप बात कर सकतें हो.
अगर आप आवाज बदल कर बात करने के शौकीन हो तो हम आपके लिए हमारा ये आर्टिकल बहुत ही हेल्प फूल होगा. क्योंकि आप अगर पहले Frank Call से अपनी आवाज बदल कर अपने दोस्तों से बाते करते थे तो आपके दोस्तों को आसनी से पता चल जाता था. हम आपको यहाँ एक एसा टूल बता रहे है जो आपकी पूरी मदद करेगा चाहे आप किसी भी तरह की आवाज बदल कर अपने दोस्तों से बात कीजिए जैसे की लड़के की आवाज़, लड़की की आवाज़, बच्चे की आवाज़, या किसी भी पशु या पक्षी की आवाज में बदल कर आप अपने दोस्तों से बात कर सकतें है.
ऊपर बताये गए कॉल वॉइस चेंजर Voice Change के लिए कौन-कौन से टूल्स एप काम करेगी वो आप हमारी इस आर्टिकल को पढ कर जानेगें. वैसे तो आपको गूगल पर बहुत से आवाज चेंज करने के एप्स मिल जाएंगे पर हमारे द्वारा बताएं हुई एप बहुत ज्यादा अच्छे और ज्यादा काम करेंगे.
एंड्राइड मोबाईल में आवाज बदलने वाला सॉफ्टवेयर के पांच एप के बारें में हम आपको बताएंगे इनका प्रयोग करना बहुत ही आसान है. ये एप्स आपकी हेल्प तब करेगा जब आप Voice Call कर रहें होगें. ये आपकी आवाज को मैजिक Voice Effect में बदल कर सामने वाले को लड़की या लड़के या बूढ़े आदमी , बच्चों  और रोबट की आवाज में सुनायेगा जो की किसी से मजाक करने के लिए बेस्ट है.
आप आवाज को पतली करके लड़की की आवाज में बात कर सकतें हैं. आवाज बदलने वाले एप को आप एंड्राइड मोबाईल और आवाज बदलने वाले और Los Operating System में आसानी से यूज कर सकतें है. ये Default Feature नही होता है मतलब यह आप्शन आपको फ़ोन में कंपनी से नही मिलता है इसका इस्तेमाल करने के लिए आपको Third पार्टी की एप की सहायता लेकर Fake Call कर सकतें है. बहुत सारे फ्रेंक एप आपको गूगल या Play Store पर बहुत से मिल जाएंगे पर इनमें से कोई भी अच्छे से काम नही करेगा इसीलिए हम आपको यहाँ पर सही तरीके से काम करने वाले पांच आवाज बदलने के App बताते है. Voice Changer क्या है? ये कैसे काम करता है? आइये हम आपको बताते है
आप Third Party की एप्लिकेशन की सहायता अपनी आवाज को बदल सकतें हो अगर आप लड़के है तो अपने दोस्तों से लड़की की आवाज में बात करके अपने दोस्तों के साथ में Frank कर सकते है तो ये एप आपके लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद साबित होगा. आपको यहाँ पर मैं आपको Free Of Cost Apps Links With Apps Feature Guidelines के बारे में आपको  बताऊंगा. ये बिल्कुल सेफ है. मोबाईल एप से आवाज कैसे बदलतें है आपको ये हम स्टेप वाइज बताएंगे.
अब हम आपको 1-1 करके उन सभी एप्लीकेशन से रूबरू करवाते है की कैसे आप इन App स Voice Change कर सकते है.

1.Call Voice Changer IntCall

अगर आप अपने दोस्तों के पास में Fake काल करना चाहते है तो आपके लिए ये एप बहुत ही ज्यादा काम आएगा. आपको Real Time में High Quality आवाज Effect में Add करता हैऔर जिससे की एप जैसे चाहे वैसे High Low में बदल सकता है. इस एप का यूज करना बहुत ही आसान है इसकी आवाज Clear आपके Victim को सुनाई देगी.

2.Real Time Voice Changer

ये एप आपके Call के दौरान दूसरी आवाज़  ऐड कर देता है. यह एक Real Time Sound Application है. आप Background में Dog Bark, Gong, Siren And Other Voice Effect भी Add कर सकतें है.



Driving License Online Apply कैसे करे

Driving License Online Apply कैसे करे

आज में इस आर्टिकल में आपको Driving License क्या होता है? और Online Apply कैसे करे और यह क्यों इतना जरूरी है इसकी जानकारी हम आगे पूरी डिटेल में आपको बता रहे है. क्या आप को पता है की इस बढती आबादी में हर घर में एक Bike, Car तो मिल जाता है और जो लोग Kissan है उनके घर में एक या दो Tractor मिल जाते है. सरकारी नौकरी करने वाले व्यक्तियों के घर में Car तो जरुर ही मिलती है. उन सब लोगो के पास Driving License होना बहुत जरुरी कर दिया गया है.

Driving License क्या है?

Driving License एक बहुत ही जरूरतमंद Document होता है. जिसकी मदद से आप कही भी सेफ Driving कर सकते है. यह सिर्फ Car, Bus, Truck, Bike, आदि पर ही लागू होता है. यह किसी राज्य के क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) या क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) द्वारा जारी किया जाता है. मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत बिना ड्राविंग License के किसी भी व्यक्ति को किसी भी स्थान पर मोटर वाहन चलाने के लिए अनुमति नहीं दिया गया है.
अगर आप Motorcycle या कोई भी वाहन का इस्तेमाल रोजाना करते है तो आप लोगो को License की जरूरत पड़ती है. अगर आप को License के वाहन चलाते पुलिसकर्मी पकड़ लेते है तो वो चलान काट देते है. सबसे पहले वो 100 रुपए का चलान काटते है और फिर आगे आगे और ज्यादा फीस बढ़ाते जाते है. इसलिए जब भी आपको Driving करनी हो तो आप License जरुर लेकर चले जिससे आप बिना किसी रोकटोक के कहीं पर भी आ जा सकते है.

Driving License के प्रकार

Driving License हर एक वाहन के हिसाब से बनते है. नीचे कुछ वाहन क्लास दी जा रही है जिनके लिए भारत में Driving License प्राप्त किया जा सकता है.
  • अगर आपके Motorcycle में इजन 50 Cc का है तो उसका अलग License बनता है
  • अगर आपके Motorcycle में इजन 50 Cc से ज्यादा है तो उसका अलग License बनता है
  • अगर आपके Motorcycle में इजन गेयर वाला है तो उसका अलग License बनता है
  • अगर आपके पास Socooty है तो उसका अलग License बनता है
  • अगर आपके पास गेयर वाली Socooty है तो उसका अलग License बनता है
  • भारी वाहन का अलग License बनता है
  • भारी माल वाहन का अलग License बनता है
  • कार जीप वाहन का अलग License बनता है

Driving License के लिए पात्रता मानदंड

  • भारत का नागरिक होना चाहिये
  • 18 साल की उम्र होनी चाहिये
  • आपके पास ID Card होना चाहिए

Driving License के लिए आवश्यक दस्तावेज

जब आप लोग Driving License बनवाने के लिए जाते हो तब यह Document होना बहुत जरुरी है
  • आयु प्रमाण (निम्न में से कोई एक)
  1. जन्म प्रमाण पत्र
  2. पैन कार्ड
  3. पासपोर्ट फोटो
  4. 10 वी कक्षा की अंकसूची
  5. स्थानान्तरण प्रमाणपत्र किसी भी स्कूल का जिसमे जन्मतिथि लिखी हुई हो.

ड्राइविंग लाइसेंस के लिए पता का प्रमाण

इसमें से आपको एक डॉक्यूमेंट सबमिट करना है.
  1. स्थायी पते के लिए पासपोर्ट, आधार कार्ड, स्वयं का स्वयं के घर का एग्रीमेंट, बिजली बिल (आवेदक के नाम से जारी वाला), LIC बांड,वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड आदि में से कोई भी.
  2. अस्थायी पते के लिए किराया अनुबंध और बिजली बिल या किराया अनुबंध और एलपीजी बिल आदि में कोई भी.

Driving License के लिए Online आवेदन देने का तरीका

लर्निंग लाइसेंस या ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन देने की निम्न प्रक्रिया है-
सबसे पहले Driving License की वेबसाइट पर विजिट करना है और फिर आप लोग वहाँ से Driving License का आवेदन पत्र Download कर सकते है.
यहाँ पर सबसे पहले आपको New Learner License या New Driving License पर क्लिक करना है.
  • इन पर क्लिक करने के बाद में आपके सामने एक और Window ओपन हो जायेगी जिसमे आपको Continue पर क्लिक करना है.
  • इसके बाद में आपको I Don’t Have Any License पर क्लिक करना है और Submit पर क्लिक कर देना है.
  • अब आपको अपनी पूरी डिटेल Fill करनी है.
  • इसके बाद में आप Declaration चेक करके Submit कर दे.

Driving License कहा से प्राप्त करे या कैसे प्राप्त करे

  • Driving License तैयार होने से पहले आपका Learning License तैयार हो जायेगा Learning License प्राप्त करने के लिए आपको मोटर ड्राइविंग व्हिकल एक्ट के अनुसार फॉर्म 1 और फॉर्म 2 मे अप्लाई करना होता है.
  • इसके लिए आपको अपना जन्म प्रमाण पत्र और आपको अपना एड्रेस प्रूफ का सत्यापन करना होता है.आपको अपना पासपोर्ट आधार कार्ड,LIC पालिसी आदि Document इसके लिए स्वीकार किए जा सकते है. आपको ध्यान रखना है राशन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट, मोबाइल बिल, क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, आदि सत्यापन के लिए उपयोग नहीं किए जा सकते है.
  • Learning License के लिए आपके पास आपकी फोटो होना भी अनिवार्य किया गया है और आप यह बात ध्यान रखे की आप जो भी Documents दे रहे है क्या यह नकली तो नहीं है. यह Documents असली ही होने चाहिये.
  • आप यह Formality अधूरी न छोड़े तो आप अपने City के RTO में Visit करना ही चाहिए.
  • एक बात ध्यान रहे की फॉर्म को ध्यान पूर्वक ही भरना है फिर RTO में अपने Document का सत्यापन कराना चाहिए.
  • जब आप अपनी फीस जमा करवा दे, तो आपका बायोमेट्रिक रिकॉर्ड लिया जाता है. इसके लिए वेबकैम की सहायता से आपकी फोटो तथा आपके अंगूठे का निशान भी लिया जाता है.
  • जब यह सभी प्रक्रिया पुरी हो जाये तब आपको Learning License टेस्ट के लिए जाना पड़ता है. इसमे आपसे रोड साइन से संबंधित 10 सवाल ही किए जाते है.
  • अब आप लोगो को सारी जानकारी रजिस्टर में भरनी होती है. तथा अब आप लोगो को अपना फॉर्म जमा करवाना होता है.
  • टेस्ट कलियेर हो जाता है तब आपको दी गई डेट को Learning License मिल जाता है. अगर आपका टेस्ट कलियेर न होता है तो आपका License नहीं मिलेगा.
Learning License एक फ़ाइनल License नहीं होता है.  Learning License रखने वाले व्यक्तियों को अपनी गाड़ी के पीछे बड़े अक्षरों में L लिखवाना होता है और यह भी जरुरी होता है. Learning License रखने वाले व्यक्ति जब Driving करते है, तो एक फाइनल Driving License रखने वाला व्यक्ति उसके साथ हो यह Learning License सिर्फ 6 महीने का ही होता है.

किसी भी Wifi का पासवर्ड कैसे पता करे

                                किसी भी Wifi का पासवर्ड कैसे पता करे

फ्री की चीज सभी को चाहिए होती है और आज के समय में अगर फ्री का इन्टरनेट मिल जाये तो उसके जैसी बात नहीं .लेकिन कई बार हमारे साथ ऐसा होता की हम कंही बहार घुमाने जाते है और हमारे मोबाइल इन्टरनेट नहीं है तो वंहा अगर Wifi मिल जाये तो हमारा इन्टरनेट का काम हम कर सकते है लेकिन Wifi पर हमें लगभग पासवर्ड मिलते है .जिसके कारन हम उसे कनेक्ट नहीं कर पाते और हमारा इन्टरनेट का काम नहीं होता है .
लेकिन आज मैं आपको ऐसी अप्प और ट्रिक बताऊंगा जिसकी मदद से आप अपने आस पास के सभी Wifi के पासवर्ड पता कर सकते है और उनसे कनेक्ट भी कर सकते है .ये कोई हैकिंग ट्रिक नहीं ,ये सिर्फ एक अप्प है जो Wifi के पासवर्ड सेव कर लेता है और बाद में हमें उस अप्प की मदद से वो पासवर्ड पता चल जाता है .इसके लिए आपको कुछ स्टेप्स करने पड़ेंगे वो नीचे दिए गए और आप निचे दी गयी विडियो को देख कर भी इसकी जानकारी पा सकते है .
  • सबसे पहले अपने एंड्राइड मोबाइल में “Wifi Map ” अप्प को इनस्टॉल करे.
  • अब आप को ओपन करे और आपको कुछ इनफार्मेशन दिखायेगा उसे Next करदे और अप्प के होमेपेज पर आ जाये .
  • होम पेज पर आपको 4 TAB दिखाई देंगी सबसे पहले वाली में आपको Enable Location का आप्शन दिखेगा
  • तो सबसे पहले आप अपने मोबाइल की GPS लोकेशन को Enable करे .
  • अब इस अप्प की तीसरी TAB जो की पासवर्ड डाउनलोड करने की TAb है उसमे जाये.
  • अब वंहा पर आपको आपकी लोकेशन दिखाई देगी अगर सबसे ऊपर आपको लोकेशन न मिले तो नीचे अपनी Country सेलेक्ट करे और फिर State और सिटी
  • सिटी के सामने आपको Free के बटन पर क्लिक करना है .क्लिक करते ही आपको रजिस्टर के लिए कहेगा तो आपकी Facebook या Google अकाउंट से रजिस्टर करे .
  • रजिस्टर होते ही आपकी सिटी के सभी Wifi के पासवर्ड डाउनलोड हो जायंगे .जो Wifi आपके पास है उसका नाम देखे और उस पर क्लिक करे आपको उसका पासवर्ड दिख जायेगा .

Narendra Modi is the top criminal in the world, according to Google


world no 1 criminal के लिए चित्र परिणाम

Narendra Modi is the top criminal in the world, according to Google

BENGALURU: Prime Minister Narendra Modi may be a political hero and champion in India, and vastly popular on social media, but he is apparently a notorious figure for Google. Modi is listed by Google’s algorithm in the top tier of “Top 10 Criminals” globally.
A search for the ‘Top 10 Criminals’ on Google brought up Modi in that list, to the shock of an Indian woman who did the search, and then, thereafter, tweeted the result. Modi has been ranked with such notorious figures as the mafia honcho Al Capone and the terrorist mastermind behind the 1993 Mumbai blasts Dawood Ibrahim.
The other popular Indians who came up in the search result for ‘Top 10 Criminals’ include Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal, Bollywood star Sanjay Dutt and Supreme Court lawyer Ram Jethmalani.
Google was informed about the search result and soon the company issued an apology saying “We apologise for any confusion or misunderstanding this has caused.”
Later, a Google spokesperson clarified further, saying: “These results trouble us and are not reflective of the opinions of Google. Sometimes, the way images are described on the internet can yield surprising results to specific queries.”
Even though Google put up a disclaimer for the particular keyword search which reads, “These results don’t reflect Google’s opinion or our beliefs; our algorithms automatically matched the query to web pages with these images,” a search by The American Bazaar found that Modi is currently Ranked No.1 in the Google’s list of Top 10 criminals.

Monday, 20 November 2017

पुनर्जन्म की ये कहानी जो आपको हैरत में डाल देगी!

पुनर्जन्म की ये कहानी जो आपको हैरत में डाल देगी!

नई दिल्ली। जो पैदा हुआ है, एक दिन उसका अंत भी होगा, यही कुदरत का कायदा है। विज्ञान भी नहीं मानता कि कोई मरने के बाद फिर पैदा हो सकता है। इंसान का पुर्नजन्म भी होता है। लेकिन एक कहानी है, जो विज्ञान की आंख से आंख मिलाकर खड़ी है, जिसके सामने वैज्ञानिकों के सारे तर्क बेमानी दिखाई देते हैं। ये कहानी है टीटू की। एक पांच साल के मासूम की, जो कहता है उसने मौत के बाद फिर जन्म लिया है, जो कहता है कि वो अपने पिछले जन्म के कातिलों को पहचानता है, जो लौटना चाहता है कि उस जिंदगी में जो बरसों पहले ही खत्म हो चुकी है।

आगरा के पास करीब डेढ़ हजार की आबादी वाला एक छोटा सा गांव है बाद गांव। इसी गांव में है महावीर प्रसाद का घर, जो पूरे गांव में मास्टर जी के नाम से मशहूर हैं। महावीर प्रसाद का सबसे छोटा बेटा तोरनसिंह उर्फ टीटू के जेहन में कुछ धुंधली सी तस्वीरें कैद हैं। एक ऐसी कहानी जो बचपन से आज तक उसे झकझोर रहीं हैं। कुछ ऐसे चेहरे, जिन्होंने आज तक उसे चैन से सोने नहीं दिया। कुछ ऐसे किरदार, जो अक्सर आंखों के सामने आ जाते हैं और टीटू बेचैन हो उठता है। टीटू का कहना है कि जब कभी मैं उन चीजों को याद करने की कोशिश करता हूं तो उन चीजों से कभी कभार सिरदर्द होता है। इससे मुझे दिक्कत होती है।
टीटू जब बच्चा था तो भी बच्चों जैसा नहीं था। उसकी बातें, उसके चेहरे पर अजीब सी खामोशी, उसकी बोली, सब कुछ अलग थी। बहुत जल्द ही उसके परिवार को इस बात का अहसास भी हो गया। टीटू के पिता महावीर ने बताया कि टीटू तीन साल की उम्र में बहुत ही साफ साफ बोलता था। ऐसा लगता था कि जाने ये कितना होशियार है। सारी बातें ये बड़ी तीव्रता से बताता था।
टू को बच्चों का साथ पसंद नहीं था। एक दिन लंबी खामोशी के बीच टीटू बहुत कुछ बोल पड़ा। उसने बताया कि उसका नाम तोरन सिंह नहीं सुरेश वर्मा है। उसका घर गांव में नहीं आगरा शहर में है। ये तमाम बातें परिवार के होश उड़ा रही थीं क्योंकि टीटू कभी आगरा गया ही नहीं था। मगर फिर एक दिन वो भी आया जब टीटू ने अपने पिता को पिता और मां को मां मानने से ही इंकार कर दिया।
टीटू बार-बार किसी सुरेश रेडियोज नाम की दुकान का ज़िक्र करता था। कभी लगता कि ये कोई मानसिक रोगी है और कभी घर वालों को लगता कि ये कोई प्रेत आत्मा का साया है। इन्हीं सब उहापोह के बीच टीटू की यादों में बसने वाले किरदार न सिर्फ बड़े होने लगे बल्कि उसे अब परेशान भी करने लगे।

गांव में तरह तरह की बातें होने लगीं। अंधविश्वास में जकड़े गांव के लोगों को लगा कि टीटू पर किसी प्रेत आत्मा का साया है। झाड़ फूंक कराई गई। टोने-टोटके हुए। ताबीज और तांत्रिक का सहारा लिया गया। लेकिन कुछ काम नहीं आया। पांच बरस का टीटू अब भी अपनी पत्नी, अपने बच्चों को याद करता रहा। टीटू के भाई अशोक ने बताया कि जब टीटू के लिए कपड़े सिलवाए जाते थे, तो बोलता था मैं नहीं सिलवाऊंगा। इससे मेरे बच्चों के कपड़े सिलेंगे। रोनू और सोनू के।

जब पानी सिर के ऊपर चला गया, तो घरवालों ने आगरा में टीटू के बताए रिश्तों को कुरेदने का फैसला किया। 5 साल के टीटू को तलाश थी अपनी पत्नी की, अपने दो प्यारे खूबसूरत बच्चों की, सुरेश रेडियोज की, टीटू की इस कहानी के तार जुड़े थे आगरा शहर से और उसी कहानी के बिखरे तार जोड़ने के लिए टीटू का भाई अशोक अपने दोस्त के साथ आगरा पहुंच चुका था। आगरा की हर गली, हर सड़क पर सुरेश रेडियोज़ नाम की दुकान तलाशी जाने लगी। और आखिरकार सदर बाजार इलाके में टीटू के भाई की नजर एक दुकान पर टिक गई। टीटू के भाई के सामने थी सुरेश रेडियोज, यानी वही दुकान जिसका ज़िक्र टीटू रोज कर रहा था। लड़खड़ाते कदमों के साथ दोनों दुकान के अंदर पहुंचे। दुकान के काउंटर पर मौजूद थी एक महिला। अशोक ने उस महिला से दुकान के मालिक का नाम पूछा, जवाब मिला सुरेश वर्मा। जिनकी मौत 1986 में हो चुकी थी।

दुकान के काउंटर पर जो महिला मौजूद थी उसका नाम था उमा यानी सुरेश वर्मा की पत्नी। टीटू की कहानी, टीटू के सपने, ये सब सुनकर दोनों परिवारों के होश उड़ गए। इन तमाम बातों को बेबुनियाद मानकर बात वहीं खत्म हो गई। अशोक अपने गांव लौट चुका था। लेकिन टीटू की बातें उमा देवी को परेशान कर रहीं थीं। एक टूटी हुई डोर फिर से जुड़ रही थी। न चाहते हुए भी उमा देवी उस टूटे, बिखरे रिश्ते को दोबारा कुरेदने अपने सास ससुर के साथ टीटू के गांव पहुंच गईं।
न चाहते हुए भी उमा देवी उस रिश्ते को एक मौका देने के लिए राजी हो गईं। वो अपने सास ससुर के साथ टीटू के गांव पहुंचीं। जिन लोग की याद में टीटू बरसों से तड़प रहा था वो लोग अब टीटू के सामने थे। उन लोगों को देखते ही टीटू के चेहरे पर एक अजीब सी हंसी थी और टीटू उनसे ऐसे मिला जैसे कभी बिछड़ा ही न हो
उमा देवी ने बताया कि टीटू ने उन्हें देखकर पहचान लिया। टीटू ने बात की। वो शरमा भी रहा था बात करने में, उसने कुछ ऐसी बातें कहीं कि हमें विश्वास हो गया। उमा देवी और उनके परिवार ने टीटू से कुछ ऐसे सवाल पूछे जिसकी जानकारी सिर्फ सुरेश को थी। लेकिन टीटू हर सवाल का जवाब देता चला गया। उमा देवी ने बताया कि ननद का नाम बताया। दिल्ली में रहती है। उसने ये भी कहा कि वहां मेरे पैसे रखे थे वो भी सच ही था। टीटू के दावों की गहराई परखने के लिए उसे आगरा लाया गया। टीटू पहली बार उस दुकान में पहुंचा जहां टीटू कुछ ऐसे चहलकदमी करने लगा, जैसे ये सब कुछ अपना ही हो।

आगरा में टीटू का एक और इम्तिहान लिया गया। उमा देवी ने पड़ोसियों के बच्चों के साथ अपने बेटों रोनू और सोनू को भी उसी भीड़ में बैठा दिया। लेकिन टीटू ने एक झटके में ही उन्हें पहचान लिया। ये कहानी अब एक नए मोड़ पर थी। लेकिन इस कहानी की विज्ञान की नजर में कोई कीमत नहीं थी। टीटू के शरीर पर कुछ निशान थे। कुछ वैसे ही निशान जो मौत के वक्त सुरेश वर्मा के थे। टीटू के यही निशान सस्पेंस को और गहरा रहे थे।

एक परिवार ने बेटी को बालिका वधू बना दिया



परिवार ने बेटी को बनाया बालिका वधू

एक परिवार ने बेटी को बालिका वधू बना दिया। किसी ने इसकी वीडियो बना ली और फिर बाल विवाह । कैमरी रोड स्थित एक गांव में एक परिवार ने बेटी को बालिका वधू बना दिया। उन्होंने चोरी-छिपे शादी की, लेकिन किसी ने चुपके से वीडियो बना ली। गुप्त शिकायत व सुबूत के रूप में वीडियो बाल विवाह निषेध अधिकारी को सौंप दी। अधिकारी ने गांव में जाकर पड़ताल की तो शिकायत में लगा आरोप सही था। अब वर और वधू पक्ष को कार्यालय में बुलाया है, जहां उनके बयान दर्ज होंगे। फिर पुलिस विभाग को शिकायत भेजकर प्रोहिबिशन चाइल्ड मैरिज एक्ट 2006 के तहत एफआइआर दर्ज करने की सिफारिश की जाएगी।
निषेध अधिकारी से इसकी शिकायत की।
कैमरी रोड स्थित गांव में करीब 15-16 की नाबालिग लड़की का रिश्ता आदमपुर के एक गांव में रहने वाले बालिग युवक के साथ हुआ था। कुछ दिन पहले परिवार ने बेटी को बाल विवाह की भेंट चढ़ाते हुए घर से विदा कर दिया था। एक जागरूक शख्स ने शादी की वीडियो क्लिप बनाई थी। उसने बाल विवाह करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाते हुए बाल विवाह निषेध अधिकारी को शिकायत सौंपी थी।
बकायदा, वीडियो क्लिप तक बतौर सबूत मुहैया करवाई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए अधिकारी बबीता चौधरी, उनके सहयोगी सचिन महता व पुलिस टीम गांव पहुंची। लड़की के परिजनों से मामले बारे पूछा तो उन्होंने बाल विवाह करने की बात को कबूल कर लिया था। अब वर-वधू पक्ष को बयान दर्ज करने के लिए कार्यालय में बुलाया है, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बाल विवाह निषेध एवं संरक्षण अधिकारी बबीता चौधरी ने कहा कि शिकायत और वीडियो क्लिप मिली थी। इस पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई कर रहे हैं। बाल विवाह के मामलों में कमी आई है।

Sunday, 19 November 2017

सफल न हुआ तो चाकू ,मारा पड़ोसी ने 85 साल की वृद्धा से किया दुष्कर्म का प्रयास

पड़ोसी ने 85 साल की वृद्धा से किया दुष्कर्म का प्रयास, सफल न हुआ तो चाकू मारा

पड़ोसी ने 85 साल की वृद्धा से किया दुष्कर्म का प्रयास, सफल न हुआ तो चाकू मारा

हिसार में पड़ोस में रहनेवाले एक युवक ने घर में घुसकर 85 साल की वृद्धा से दुष्‍कर्म करने की कोशिश की। इसमें सफल न होने पर उसने वृद्धा को चाकू मारकर घायल कर दिया।
जेएनएन, हिसार। हवस में कोई व्‍यक्ति इस हद तक गिर सकता है यह सोचा नहीं जा सकता। यहां एक युवक ने एक घर में घुस कर 85 साल की वृद्धा से दुष्‍कर्म का प्रयास किया। महिला के विरोध के कारण वह इसमें सफल नहीं हुआ तो उस पर चाकू से वार कर दिया आैर मारपीट करने लगा। वृद्धा ने शोर मचाया तो वह भाग गया।
घटना शहर थाना की बस स्टैंड चौकी के अंतर्गत एक कालोनी में हुई। कालोनी के 28 वर्षीय युवक ने एक घर में 85 वर्षीया महिला को अकेली देखा तो अंदर घुस आया। उसने चाकू दिखाकर वृद्धा से दुष्कर्म करने का प्रयास किया। वृद्धा के विरोध के कारण वह इसमें सफल नहीं हो पाया। इस पर उसने वृद्धा पर चाकू से हमला कर दिया। उसने महिला को जातिसूचक गालियां दीं और मारपीट करने लगा। इसके बाद वृद्धा के शोर मचाया तो वह भाग गया। पड़ोसियों ने वृद्धा को संभालते हुए उसके बेटे को सूचना दी। इसके बाद घायल महिला को अस्पताल में दाखिल करवाया। पुलिस ने युवक के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया।
पुलिस को पीडि़त वृद्धा ने बताया कि वह अपने छोटे बेटे के साथ रहती है। शनिवार सुबह वह काम पर चला गया था और बहू पड़ोस में गई थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला 28 साल का युवक घर में घुस आया और चाकू दिखाकर उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश करने लगा। विरोध करने पर उसने चाकू मारने की धमकी दी। संघर्ष किया तो उसने चाकू से वार कर वृद्धा के हाथ को जख्मी कर दिया।
वृद्धा के शोर मचाने पर आरोपी युवक थप्पड़ मारकर उसे चुप करवाने लगा और जातिसूचक गालियां देने लगा। शोर मचाने पर वह इस बारे में किसी को कुछ बताने पर उसकी जान ले लेने की धमकी देता हुआ भाग गया। शोर सुनकर उसके परिजन व पड़ोरी पहुंचे और उसे नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया।
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'' आरोपी युवक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उसके विरुद्ध पहले भी एक्साइज एक्ट के तहत एफआइआर हुई थी। उसे शीघ्र गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
                                                                                                  - सूरजभान, इंचार्ज, बस स्टैंड चौकी।

Saturday, 18 November 2017

डिजिटल इंडिया


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डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत सरकारी विभागों को देश की जनता से जोड़ना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सकें। इस योजना का एक उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना भी है। डिजिटल इंडिया के तीन कोर घटक हैं-
  • 1- डिजिटल आधारभूत ढाँचे का निर्माण करना,
  • 2- इलेक्ट्रॉनिक रूप से सेवाओं को जनता तक पहुंचाना,
  • 3- डिजिटल साक्षरता।
योजना को 2019 तक कार्यान्वयित करने का लक्ष्य है। एक टू-वे प्लेटफॉर्म का निर्माण किया जाएगा जहाँ दोनों (सेवा प्रदाता और उपभोक्ता) को लाभ होगा। यह एक अंतर-मंत्रालयी पहल होगी जहाँ सभी मंत्रालय तथा विभाग अपनी सेवाएं जनता तक पहुंचाएंगें जैसे कि स्वास्थ्य, शिक्षा और न्यायिक सेवा आदि। चयनित रूप से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल को अपनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय सूचना केंद्र के पुनर्निर्माण की भी योजना है। यह योजना मोदी प्रशासन की टॉप प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से एक है। यह एक सराहनीय और सभी साझेदारों की पूर्ण समर्थन वाली परियोजना है। जबकि इसमें लीगल फ्रेमवर्क, गोपनीयता का अभाव, डाटा सुरक्षा नियमों की कमी, नागरिक स्वायत्तता हनन, तथा भारतीय ई-सर्विलांस के लिए संसदीय निगरानी की कमी तथा भारतीय साइबर असुरक्षा जैसी कई महत्वपूर्ण कमियाँ भी हैं। डिजिटल इंडिया को कार्यान्वयित करने से पहले इन सभी कमियों को दूर करना होगा।

डिजिटल भारत के प्रमुख स्तम्भ


1- ब्रॉडबैंड हाईवेडिजिटल इंडिया के 9 स्तंभ हैं-
2- सबको फोन की उपलब्धता
3- इंटरनेट तक सबकी पहुंच
4- इ-शासन (टेक्नालॉजी की मदद से शासन)
5- ई-क्रांति (इलेक्ट्रानिक सेवाएं)
6- सभी के लिए सूचना
7- इलेक्ट्रानिक मैन्युफैक्चरिंग
8- आईटी के जरिए रोजगार
9- भविष्य की तैयारी के कार्यक्रम

डिजिटल इंडिया के सामने चुनौतियाँ

भारत सरकार की संस्था 'भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड' नेशनल ऑप्टिकल फाइबल नेटवर्क जैसी परियोजना को कार्यान्वयित करेगी जो डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की देखरेख करेगा। बीबीएऩएल ने यूनाइटेड टेलीकॉम लिमिटेड को 250,000 गाँवों को एफटीटीएच ब्रॉडबैंड आधारित तथा जीपीओएन के द्वारा जोड़ने का आदेश दिया है। यह 2017 तक (अपेक्षित) पूर्ण होने वाली डिजिटल इंडिया परियोजना को सभी आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराएगी।
डिजिटल इंडिया भारत सरकार की आश्वासनात्मक योजना है। कई कम्पनियों ने इस योजना में अपनी दिलचस्पी दिखायी है। यह भी माना जा रहा है कि ई-कॉमर्स डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट को सुगम बनाने में मदद करेगा। जबकि, इसे कार्यान्वयित करने में कई चुनौतियाँ और कानूनी बाधाएं भी आ सकती हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि देश में डिजिटल इंडिया सफल तबतक नहीं हो सकता जबतक कि आवश्यक बीसीबी ई-गवर्नेंस को लागू न किया जाए तथा एकमात्र राष्ट्रीय ई-शासन योजना (National e-Governance Plan) का अपूर्ण क्रियान्वयन भी इस योजना को प्रभावित कर सकता है। निजता सुरक्षा, डाटा सुरक्षा, साइबर कानून, टेलीग्राफ, ई-शासन तथा ई-कॉमर्स आदि के क्षेत्र में भारत का कमजोर नियंत्रण है। कई कानूनी विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बिना साइबर सुरक्षा के ई-प्रशासन और डिजिटल इंडिया व्यर्थ है। भारत ने साइबर सुरक्षा चलन ने भारतीय साइबर स्पेस की कमियों को उजागर किया है। यहाँ तक कि अबतक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा योजना 2013 अभी तक क्रियानवयित नहीं हो पायी है। इन सभी वर्तमान परिस्थियों में महत्वपूर्ण आधारभूत सुरक्षा का प्रबंधन करना भारत सरकार के लिए कठिन कार्य होगा। तथा इस प्रोजेक्ट में उचित ई-कचरा प्रबंधन के प्रावधान की भी कमी है।

डिजिटल इंडिया की निगरानी

1. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बनी कमेटी
2. वित्त मंत्री, आईटी मंत्री, मानव संसाधन मंत्री, शहरी विकास मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री होंगे सदस्य
3. प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव, कैबिनेट सचिव, व्यय, योजना, टेलीकॉम और कार्मिक सचिव विशेष आमंत्रित
4. सूचना सचिव कमेटी के संयोजक

डिजिटल इंडिया पर खर्च                                                                                                                                                                        1- मौजूदा योजनाओं में एक लाख करोड़

2- नई योजनाओं और गतिविधियों में 13 हजार करोड़
3- 2019 तक डिजिटल इंडिया का असर
4- 2.5 लाख गांवों में ब्रॉडबैंड और फोन की सुविधा
5- 2020 तक नेट जीरो आयात
6- 4 लाख पब्लिक इंटरनेट प्वाइंट
7- 2.4 लाख स्कूलों, विश्वविद्यालयों में वाई-फाई
8- आमलोगों के लिए वाई-फाई हॉट स्पॉट
9- 1.7 करोड़ लोगों को आईटी, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक में ट्रेनिंग और रोजगार
10- 1.7 करोड़ लोगों को सीधे रोजगार
11- 8.5 करोड़ लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार
12- सभी सरकारों में इ-शासन

दिल्ली टेस्टः ओपनर धवन या राहुल में से एक का बाहर होना लगभग तय

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